अपने तय समय से पहले पूरी हो सकती है तवांग की सुरंग, भारतीय सेना को मिलेगी मदद

सुरंग के तैयार होने की समय सीमा जून 2022 थी, लेकिन होगी पहले बनकर तैयार

सुरंग के तैयार होने की समय सीमा जून 2022 थी, लेकिन होगी पहले बनकर तैयार

सुरंग के तैयार होने की समय सीमा जून 2022 थी, लेकिन होगी पहले बनकर तैयार
सुरंग के तैयार होने की समय सीमा जून 2022 थी, लेकिन होगी पहले बनकर तैयार

भारत सरकार ने 2018 में अरुणाचल प्रदेश के तवांग में सेला सुरंग बनाने की घोषणा की थी। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 700 करोड़ रुपये हैं, यह सुरंग भारतीय सेना को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर जाने में और हथियार पहुंचाने में खासी मदद करेगी। यह सुरंग के तैयार होने की समय सीमा जून 2022 थी लेकिन अब सूत्रों के मुताबिक यह सुरंग अपने निर्धारित समय से पहले ही बनकर तैयार हो जाएगी। समुद्र के स्तर से 17,000 फुट की ऊँचाई पर बन रही है ये सौरव जो तवांग आने जाने का समय एक घंटा घटा देंगे और साथ ही साथ ही बारहों महीने यानी कि हर मौसम में खुली रहेगी।

एक घंटे का सफर होगा इससे कम 

सेला सुरंग प्रोजेक्ट डायरेक्टर कर्नल परीक्षित मिश्रा के अनुसार यह सुरंग 13 हज़ार फुट पर दुनिया की सबसे बड़ी जुड़वा लेकिन सुरंग होगी जो हर मौसम में खुली रहेगी और आने जाने की समय सीमा को करीब घंटे भर तक घटाएगी। इस सुरंग से भारतीय सेना को भी LAC के पास वाले इलाकों में पहुँचने और हथियारों को लेकर आने जाने में काफ़ी मदद मिलेगी।

अरुणाचल प्रदेश में बन रही सेला सुरंग का ज़िम्मा बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन(BRO) को मिला है और इस सुरंग के तीन हिस्से होंगे जिसमें एक मुख्य सुरंग, एक सुरंग भागने के लिए और तीसरी एक छोटी सुरंग होगी और एक सड़क मुख्य सुरंग और छोटी सुरंग को जोड़ेगी। मुख्य और भागने की सुरंग दोनों की लम्बाई 1,555 मीटर की होगी जबकि छोटी सुरंग की लम्बाई 980 मीटर की है।

यह सुरंग अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कमेंग जिला में बन रही है और चीनी सीमा के पास बन रहे बलिपारा-चारदर-तवांग सड़क प्रोजेक्ट के नज़रिए से काफ़ी अहम भूमिका निभाएगी।

क़रीब 50 इंजीनियर और 500 मजदूर सेला सुरंग के निर्माण कार्य में जुटे हैं, हिमाचल प्रदेश में बने अटल टनल के डायरेक्टर रह चुके कर्नल परीक्षित मेहरा अरुणाचल में बन रहे इस सुरंग के भी प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं।

अनुमान ये लगाया जा रहा है की सेलन सुरंग से लगभग 4,000 सेना और नागरिकों के वाहनों का आना जाना होगा। इस सुरंग से भारतीय सेना को हर तरह के टैंकों, हथियारों यहाँ तक की बोफोर्स जैसे हथियारों को भी ले जाने में आसानी होगी।

चीन की बढ़ती ताकत देखते हुए इस सुरंग की अहमियत और भी ज़्यादा बढ़ गयी है, और भारत सेला सुरंग पर काफी तेजी से काम कर रहा है।