केंद्र ने कहा प्याज पिछले साल से सस्ता, अब दिखा किए प्रयासों का असर

FIFO सिद्धांत पर बफर से प्याज की कैलिब्रेटेड और लक्षित रिलीज शुरू

FIFO सिद्धांत पर बफर से प्याज की कैलिब्रेटेड और लक्षित रिलीज शुरू

FIFO सिद्धांत पर बफर से प्याज की कैलिब्रेटेड और लक्षित रिलीज शुरू
FIFO सिद्धांत पर बफर से प्याज की कैलिब्रेटेड और लक्षित रिलीज शुरू

इस साल प्याज की कीमत पिछले साल की तुलना में सस्ती है, केंद्र ने बताया कि प्याज़ की कीमतों को कम करने के सरकार के प्रयास अब जाकर परिणाम दे रहे हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में जानकारी दी कि प्याज के अखिल भारतीय खुदरा और थोक मूल्य वर्तमान में क्रमशः ₹40.13 प्रति किलोग्राम और 3,215.92 प्रति क्विंटल हैं।

मंत्रालय ने कहा “कीमतों को कम करने के लिए, उपभोक्ता मामलों के विभाग ने पहले-इन-पहले-आउट (FIFO) सिद्धांत पर बफर से प्याज की कैलिब्रेटेड और लक्षित रिलीज शुरू की है। 

प्रमुख किचन स्टेपल की कीमतों में बढ़ोतरी अक्टूबर के पहले सप्ताह में शुरू हुई और कोलकाता में 60 रुपये प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गई। सरकार ने इसके लिए बारिश को जिम्मेदार ठहराया, जिसके बारे में उसने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई। कीमत को स्थिर करने के लिए, केंद्र ने उन राज्यों में बफर स्टॉक जारी किया जहां प्याज अखिल भारतीय औसत मूल्य से ऊपर बेचा जा रहा था। सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्याज को अपने बफर स्टॉक से 21 रुपये प्रति किलो की एक्स-स्टोरेज दर पर बेचने की भी पेशकश की।

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कीमतों में किसी भी बड़े उछाल से निपटने में मदद के लिए केंद्र ने अगस्त में 200,000 टन प्याज का रिकॉर्ड भंडार बनाया। उस वर्ष मार्च और अप्रैल के दौरान बेमौसम बारिश के कारण प्याज की कीमतें अक्टूबर 2020 में भी दोगुनी हो गई थी, जिससे फसलें बुरी तरह प्रभावित हो गई थी।

कुछ खाद्य पदार्थों की कीमतें, जहां मौसम एक बड़ी भूमिका निभाता हैं। अस्थिरता से झुझता हुआ प्याज उनमें से एक है। इसकी दरें अक्सर खाद्य मुद्रास्फीति को बढ़ावा देती हैं और उपभोक्ताओं, गरीब या अमीर के मासिक बजट को हिला के रख देती हैं।