अर्जुन बिजलानी बने खतरों के खिलाड़ी सीजन इलेवन के विजेता दिव्यंका त्रिपाठी बनी पहली रनर अप

arjun and divyanka

26 सितंबर रविवार को हुए खतरों के खिलाड़ी सीजन इलेवन के फिनाले को अपना विजेता मिल चुका है 17 जुलाई से प्रीमियर हो रहा यह शो रविवार को समाप्त हुआ । दिव्यंका त्रिपाठी विशाल आदित्य सिंह को हराते हुए अर्जुन बिजलानी ने खिताब अपने नाम किया वही दिव्यंका त्रिपाठी पहली रनर अप बनी।

कलर्स टीवी के मोस्ट एडवेंचरस रियलिटी शो खतरों के खिलाड़ी सीजन इलेवन के नतीजों ने दर्शकों को थोड़ा अचंभित कर दिया है फैंस ने जो उम्मीदें लगा रखी थी उससे उल्टा ही नतीजा आया है।

रोहित शेट्टी ने जो कि इस शो के होस्ट भी थे अर्जुन बिजलानी की तारीफ करते हुए कहा अर्जुन हमेशा शांत होकर अपना टास्क कंप्लीट करते हैं और जीत के बाद भी दिखावा नहीं करते उन्होंने हमेशा अच्छा प्रदर्शन दिया है।

अर्जुन टीवी इंडस्ट्री जाना माना नाम है उनको मिले हम तुम और नागिन जैसे शो से सफलता मिली अर्जुन को 2000000 रुपए और एक कार उनकी जीत पर मिली,

भले ही नतीजे कुछ भी हो लेकिन दर्शकों को दिव्यंका त्रिपाठी के जीतने के आसार ज्यादा नजर आ रहे थे पहले ही दिन से क्योंकि दिव्यंका ने असाधारण प्रदर्शन दिया है पूरे शो के दौरान लेकिन किस्मत अर्जुन बिजलानी की तेज निकली उन्होंने अच्छा प्रदर्शन दिया और विजेता चुने गए।

शो के आखिरी हफ्ते में टॉप फाइव कंटेस्टेंट चुने गए थे जिसमें राहुल वैद्य श्वेता तिवारी अर्जुन बिजलानी दिव्यंका त्रिपाठी विशाल आदित्य सिंह शामिल थे ,

अर्जुन बिजलानी की पत्नी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ट्रॉफी की तस्वीर शेयर करें जिसमें अर्जुन का नाम लिखा है।

शो का आखरी टास्क बड़ा ही दिलचस्प और रोमांचक था या किसी फिल्म के क्लाइमेक्स की तरह प्रतीत हो रहा था इसमें कंटेस्टेंट को बोट पर बैठकर पानी के बीचो बीच बने मार्क तक जाना था फिर वहां पर एक चॉपर आएगा और कंटेस्टेंट को उस चॉपर से अपनी बोट खुद हुक करना था फिर व चॉपर कंटेस्टेंट को लेकर उड़ जाएगा और पानी के दूसरे मार्ग पर जहां एक जलता हुआ घर होगा कंटेस्टेंट को बोट पर लगी नेट से चाबी निकालकर हुक करना था और पानी में डाइव मारना था स्विमिंग करते हुए उस जलते हुए घर की तरफ जाना था घर के पास पहुंच कर एक सिलेंडर जोकि लॉक है कंटेस्टेंट को बोट से निकाली हुई चाबी से उस सिलेंडर को खोल कर आग बुझा कर घर के अंदर जाना था और एक रखे हुए पुतले को उठाकर छत की ओर आना था।